पांच महीने से वेतन नहीं मिलने पर मिड-डे-मिल वर्करों की आजीविका पर मंडराया संकट

पांच महीने से वेतन नहीं मिलने पर मिड-डे-मिल वर्करों की आजीविका पर मंडराया संकट 

शब्बीर अहमद, तावडू|( ATV HARYANA ) 

मिड-डे-मिल कार्यकर्ताओं को पिछले करीब पांच महीने से वेतन ना मिलने से भारी परेशानी हो रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे में उन्हें परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। हालात ये हैं कि वेतन ना मिलने से न तो वह अपने बच्चों की स्कूली फीस जमा कर पा रहे हैं और ना ही परिवार का सही से गुजारा। बृहस्पतिवार को सभी कार्यकर्ताओं ने मिलकर पहले प्रदर्शन किया और फिर एआईयूटीयूसी के राज्य कमेटी सदस्य श्रवण गुप्ता व यूनियन की जिला प्रधान देवकी व जिला सचिव शारदा देवी के नेतृत्व में खंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

 मिड-डे-मिल कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में कहा कि मिड-डे-मिल कार्यकर्ताओं में गरीब परिवारों की महिलाएं हैं। जिन्हें केवल सात हजार रुपये का मानदेय मिलता है जो एक वर्ष में केवल 10 माह का ही दिया जाता है। ग्रीष्म व शीतकालीन अवकाश का वेतन नहीं दिया जाता। इससे बढ़ती मंहगाई में घर चलाना बहुत मुश्किल है। परन्तु अफसोस है कि हमें पिछले पांच महीने से कोई मानदेय ही नहीं मिला। इस दौरान सभी  त्यौहार भी निकल गए। हम और हमारे बच्चे त्यौहारों पर भी तरसते रह गये। परन्तु विभाग ने मानवता के नाते भी एक पैसा नहीं दिया। हम बहुत परेशान हैं और संकट मे हैं। पूरे दिन स्कूल में काम करते हैं इसलिए कहीं ओर मज़दूरी भी नहीं कर सकते। हमारी आजीविका का एकमात्र स्रोत यही है। एआईयूटीयूसी के राज्य कमेटी सदस्य व जिला गुडगांव अध्यक्ष रामकुमार  ने कहा कि मांगपत्र में मांग की गई कि पिछले पांच महीने का बकाया मानदेय तुरंत जारी किया जाए। हमारे मानदेय का भुगतान हर महीने की सात तारीख तक नियमित रूप से किया जाए। मानदेय पूरे 12 महीने का दिया जाए। ग्रीष्म व शीतकालीन अवकाश का वेतन न काटा जाए। हमारा मानदेय हरियाणा सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन के बराबर किया जाए। महंगाई के हिसाब से ड्रेस के बदले 600 रूपये की बजाए कम से कम 1,500 रुपये का भुगतान किया जाए। कम से कम 15 बच्चों पर एक मिड-डे-मील कुक की नियुक्ति की जाए। रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष की जाए और रिटायर होने पर एकमुश्त कुछ आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। प्रदर्शन में सुनीता, माया, शकुंतला, सावित्री, मुकेश, राजो,सुनीता, समीना, रबीना,  चंद्रवती, सुमन, गीता, राजकुमारी, संतोष, बबीता, रितु, शारदा, समीना, रामकुमार रजनी, रोशनी, विजेंद्री, राजकुमारी, कौशल्या, चंद्रवती, रविता, अर्जिया, विजयलक्ष्मी आदि अनेक महिला कार्यकर्ताओं  ने हिस्सा लिया।

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