माह-ए-रमजान रहमत और बरकतों का महीना
माह-ए-रमजान रहमत और बरकतों का महीना
(ATV HARYANA)
मोहम्मद मुस्तफा, नूंह।
माह-ए-रमजान का पवित्र महीना साल के ११ महीनों से अफजल है। ये महीना रहमत और बरकतों का महीना है। इसमें लोग खुदा को राजी करने के लिए रोजा रखते हैं और तरावीह की नमाज पढ़ते हैं, गुनाहों से तौबा करते हैं, गरीबों की मदद करते हैं और बुरे कामों से बचते हैं। बाकि महीनों के मुकाबले इस महीने में मस्जिदें नमाजियों से गुलजार नजर आती हैं। जो लोग कुरआन पढ़े हुए हैं, वह कुरआन की तिलावत करते हैं। खास बात ये है कि इस महीने में यदि कोई इंसान गरीबों और जरुरतमंदों पर एक रुपया खर्च करता है तो उसका ७० गुना सवाब मिलता है, जबकि अन्य महीनों में ऐसा नहीं है।
माह-ए-रमजान रहमत और बरकतों का महीना है। इस महीने में रोजा रखने वालों को अल्लाह पाक रोजा रखने का सवाब खुद अता करेंगे। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजों को बंद कर दिया जाता है। रमजान का चांद नजर आते ही शैतान को कैद कर दिया जाता है। मुबीन अहमद पापड़ा ने कहा कि वैसे तो हर महीना, हर दिन, हर पल खुदा की इबादत की जा सकती है, लेकिन जितना अज्र रमजान के महीनें में मिलता है, इतना बाकि समय में नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि लोग सदका, जकात और फित्रा के नाम से गरीबों पर भी खर्च करते हैं। इतना ही नहीं रोजा इफ्तियार में भी एक दूसरे का ख्याल रखा जाता है।
मुस्तकीम समाजसेवी डूंगेजा
रमजान का महीना बड़ी बरकत और खुदा से अपनी मगफिरत कराने का सबसे अच्छा महीना है। इस महीने में मोमिन को अपने गुनाहों की तौबा कर अपने आपको पाक करना चाहिए, रोजा रखना इंसान की परीक्षा होती है, अल्लाह पाक देखते हैं कि मेरे बंदों में से कौन-कौन मेरी रजा के लिए रोजा रख रहा है। तीस दिन के रोजा रखने के बाद ईद का त्यौहार आता है, जो कि खुदा की तरफ से रोजेदारों के लिए एक तोहफा होता है। मुस्तकीम समाजसेवी डूंगेजा ने कहा कि रमजान के महीने की हम सबको कद्र करनी चाहिए, क्योंकि ये महीना बड़ी बरकत वाला महीना है। इस पवित्र माह में इबादत करने पर अल्लाह के बड़े वायदे हैं।
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