रमजान की अहम इबादत है रोजा: अमजद खान


रमजान की अहम इबादत है रोजा: अमजद खान


मोहम्मद मुस्तफा, नूंह

पवित्र माह रमजान की सबसे खास इबादत रोजा है। अल्लाह ताला फरमाते हैं कि तुम जमीन वालों पर रहम करो मैं, तुम पर रहम करुंगा। इस महीने में अल्लाह की रहमतें नाजिल होती हैं। रोजा हर बालिग मुस्लिम पर फर्ज हैं। इस महीने में लोग खुदा की इबादत करने के साथ-साथ गरीब लोगों पर भी खर्च करते हैं, जिसे सदका कहा जाता है।
अमजद खान लहाबास ने कहा कि रमजान का महीना शुरु होते ही लोगों में चहल पहल बढ़ जाती है। मस्जिदों में भी इस महीने में नमाजियों की संख्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि रमजान का चांद नजर आते ही शैतान कैद कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। अल्लाहतआला अपनी रहमत से गुनाहगारों को अजाब से निजात देते हैं। नेक काम के सवाब में 70 गुना इजाफा कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सल्लल्लाहू अलैईही वासल्लम ने फरमाया कि अगर लोगों को मालूम हो जाए कि रमजान क्या चीज है तो मेरी उम्मत साल के 12 महीने रमजान होने की तमन्ना करेगी। रमजान का महीना रहमत व बरकत वाला है। हर मर्द, बच्चे, औरत और बूढ़े रोजे के साथ नमाज-तरावीह में मशगूल रहते हैं। पहला अशरा खत्म होने के बाद दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू होगा। रमजान का महीना वक्त की पाबंदी का अभ्यास कराता है। रोजा ही एक ऐसी इबादत है। जिसमें सीधा अल्लाह ताला से इन्सान का सम्पर्क होता है।

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