रमजान के पहले जुमा में उमड़ी मस्जिदों में नमाजियों की भीड़
रमजान के पहले जुमा में उमड़ी मस्जिदों में नमाजियों की भीड़
मोहम्मद मुस्तफा | एटीवी हरियाणा |नूंह |
रमजान के पवित्र माह के पहले जुमा की नमाज गांव और शहरों की मस्जिदों में शांतिपूर्वक ढंग से अदा की गई। जुमे में हर मस्जिद नमाजियों से भरी हुई नजर आई। नमाजियों ने जुमे की नमाज के बाद अपने गुनाहों की माफी के अलावा देश में अमन शांति और उन्नति के लिए भी दुआ मांगी। इस मौके पर जुमे की नमाज पढ़ाने वाले मौलानाओं ने गुनाहों से बचने, बुरे कामों को छोडक़र सही रास्ते पर चलने, आपस में प्यार मोहब्बत को बढ़ावा देने और रमजान के पाक महीने में एक दूसरे की मदद करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बयान के माध्यम से रोजा टूटने के कारण, रोजा से किन किन चीजों का परहेज करना चाहिए, कुरआन की इबादत सहित तमाम जानकारियां बयान के माध्यम से दी गई।
बता दें कि माह ए रमजान के पाक महीना बड़ी बरकत और रहमतों का महीना है। इस महीने में मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखते हैं, जो हर मुसलमान पर फर्ज होते हैं। सुबह से लेकर शाम तक रोजेदार खुदा को राजी करने के लिए भूख और प्यास बर्दाश्त करते हैं। खास बात यह है कि इस महीने में एक रुपया खर्च करने के बदले 70 रुपये खर्च करने के बराबर अजर मिलता है। माह ए रमजान में गरीब और यतीम लोगों की भरपूर मदद की जाती है, जिसे फितरा कहते हैं। मौलाना आबिद ने कहा कि रोजा केवल भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है। रोजा आंख, कान, मुंह समेत पूरे शरीर का होता है। मर्द को चाहिए कि रोजे के दौरान झूठ नहीं बोले, हक कमाई का जरिया बनाए, अपने पडोसी का ख्याल रखे, दूसरे को तकलीफ ना दे।
बता दें कि माह ए रमजान के पाक महीना बड़ी बरकत और रहमतों का महीना है। इस महीने में मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखते हैं, जो हर मुसलमान पर फर्ज होते हैं। सुबह से लेकर शाम तक रोजेदार खुदा को राजी करने के लिए भूख और प्यास बर्दाश्त करते हैं। खास बात यह है कि इस महीने में एक रुपया खर्च करने के बदले 70 रुपये खर्च करने के बराबर अजर मिलता है। माह ए रमजान में गरीब और यतीम लोगों की भरपूर मदद की जाती है, जिसे फितरा कहते हैं। मौलाना आबिद ने कहा कि रोजा केवल भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है। रोजा आंख, कान, मुंह समेत पूरे शरीर का होता है। मर्द को चाहिए कि रोजे के दौरान झूठ नहीं बोले, हक कमाई का जरिया बनाए, अपने पडोसी का ख्याल रखे, दूसरे को तकलीफ ना दे।

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